बारह परम्पराएँ

हर परंपरा, आमने-सामने

बारह परंपराएँ — हर एक के अपने सिद्धांतों का नक्षत्र, हर एक अपनी मूल भाषा के रत्न सहेजे हुए। किसी परंपरा को वरीयता नहीं; पढ़ने का क्रम वर्णानुक्रम में है।